मित्रों एक पहल पर बात करें ...
छत पर प्यास के कारण जब पखेरू बेमौत मर रहें हों तो एक उपाय सूझता है क्यों न हम सभी अपना जन्म दिन यानि birthday को bird day के रूप में मना लें और गिफ्ट के रूप में मिट्टी के बड़े कटोरे / बाउल या अन्य उचित पानी रखने के बर्तन आदि देने की प्रथा कर लें ताकि इनमें पानी भरकर छतों या बालकनी में रखा जा सकें और इन खूबसूरत चह-चहाते , पर्यावरण के प्रहरी पांक्षियों की प्यास बुझे....चिड़िया बहुत आज है प्यासी । poetry by awadhesh singh on thirsty bird

चिड़िया बहुत आज है प्यासी 
=================
नहीं दीखते हैं तालाब
पनघट हैं बे सैलाब 
कुएं पनारे मटकी गगरी
मांगे है पानी का हिसाब 
सोता सूख गए भूगर्भी 
दिखे तनिक न बूंद जरा सी .....

साबुत जंगल शहर निगल गए 
गाँव कंक्रीट में ढल गए 
चकाचौंध खा गयी हरियाली 
मौसम के भी रूप बदल गए 
अंधड़ था न तूफा आया 
ऐसी अजब चली हवा सी ...

पोखर सब समतल कर डाले 
नदी में गिरते गंदे नाले 
सागर नदी झील झरनों की 
तस्वीरें कमरों में लगा ले 
नयी सभ्यता नए लहजे में 
जल पर बात हुई सियासी ...
चिड़िया बहुत आज है प्यासी ... - अवधेश सिंह 13/06/2017