मंडी हाउस से :

राजभाषा का क्रियान्वयन एवं कम्प्यूटर प्रौद्योगिकी पर कार्यशाला 

राजभाषा का क्रियान्वयन एवं कम्प्यूटर प्रौद्योगिकी पर कार्यशालासंगीत नाटक अकादेमी, नई दिल्ली के राजभाषा अनुभाग द्वारा दिनांक 29 मई 2017 को ‘राजभाषा का क्रियान्वयन एवं कम्प्यूटर प्रौद्योगिकी’ विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में संगीत नाटक अकादेमी की सचिव श्रीमती ऋता स्वामी चौधरी तथा संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार में राजभाषा विभाग के निदेशक श्री वेद प्रकाश गौड़ ने राजभाषा के विकास एवं प्रसार में कम्प्यूटर प्रौद्योगिकी की महत्ता पर प्रकाश डाला तथा अकादेमी के कर्मियों से कम्प्यूटर पर हिन्दी के प्रयोग के विभिन्न सुझाव भी दिए। इस अवसर पर श्री गौड़ ने अनुवाद की महत्ता और जटिलता के सन्दर्भ में भी उपस्थित कर्मियों का ज्ञानवर्द्धन किया और इसे कला के रूप में सीखने और प्रयोग करने की सलाह भी दी।

कार्यशाला का प्रारम्भ संगीत नाटक अकादेमी के राजभाषा विभाग के श्री तेजस्वरूप त्रिवेदी के स्वागत वक्तव्य से हुआ। इसके बाद सचिव श्रीमती ऋता स्वामी चौधरी ने कार्यशाला के प्रारम्भ पूर्व बीज वक्तव्य दिए। उन्होंने सूचना-प्रौद्योगिकी के इस युग में पुरानी कार्य-संस्कृति में बदलाव की वकालत करते हुए कहा कि ‘ग्लोबलाइजेशन के इस दौर में पुराने माइंडसेट से मुक्त हुए बिना आगे बढ़ना सम्भव नहीं है। राजभाषा हिन्दी के उन्नयन एवं विकास हेतु वर्तमान समय में कम्प्यूटर प्रौद्योगिकी के साथ सहज होना आवश्यक है और यह तभी सम्भव है जब हम नित अभ्यास से अपनी दक्षता निखारें।’ उन्होंने राजभाषा विभाग द्वारा अकादेमी के कर्मचारियों को कम्प्यूटर पर हिन्दी टंकण के प्रशिक्षण कार्य को गंभीरता से लेने और प्रशिक्षण के बाद कर्मचारियों की कार्य-क्षमता में हुई वृद्धि के आलोक में राजभाषा विभाग की सराहना भी की। उन्होंने कहा कि ‘अँग्रेजी भले आवश्यक हो, अंतर्राष्ट्रीय भाषा हो, किन्तु यह हमारी मातृभाषा का स्थान नहीं ले सकती। हमारी आत्मिक अभिव्यक्ति निश्चित रूप से मातृभाषा हिन्दी में ही सम्भव है। हमारा काम भारतीय संस्कृति का संरक्षण एवं सम्वर्द्धन है और यह कार्य मातृभाषा में ही सम्भव है। इसी से कालांतर में संस्कार निर्मित होता है।’ उन्होंने सभी कार्मिकों से अपील की कि हिन्दी में खुलकर बात करें, लिखें अर्थात अभिव्यक्त करें क्योंकि इसी से संस्कार का परिष्करण होगा। उन्होंने कहा कि इन दिनों हमारी पढ़ने की प्रवृत्ति का ह्रास हो रहा है जो कि चिंताजनक है। हमें कुछ न कुछ पढ़ते रहने की आदत डालनी चाहिए।

राजभाषा का क्रियान्वयन एवं कम्प्यूटर प्रौद्योगिकी पर कार्यशाला

कार्यशाला के प्रारम्भ में संस्कृति मंत्रालय के राजभाषा विभाग के निदेशक श्री वेद प्रकाश गौड़ ने कहा कि हिन्दी भाषा नहीं, जीवन शैली है। यह राष्ट्र की आत्मा है। उन्होंने चिंतक ओडोनिल स्केमल को उद्धृत करते हुए कहा कि किसी भी राष्ट्र की आत्मा को समझने के लिए उस राष्ट्र की भाषा का ज्ञान और साहित्य की समझ का होना अत्यावश्यक है। श्री गौड़ ने पुनश्च फादर कामिल बुल्के की टिप्पणी का हवाला देते हुए कहा कि यदि आज हिन्दी विश्वभाषा बनने की दिशा में अग्रसर है तो इसका कारण इस भाषा की वैज्ञानिकता है। इसके बाद उन्होंने विभिन्न उद्धरणों के माध्यम से अनुवाद की बारीकियों से उपस्थित कर्मियों को परिचित कराया और अभ्यास भी करवाए। उन्होंने सरकारी कामकाज में हिन्दी के प्रति उदासीनता को लक्षित करते हुए कहा कि लोगों ने अपनी कमियों को छुपाने के लिए अँग्रेजी को ढाल के रूप में इस्तेमाल करने की प्रवृत्ति अपना रखा है। उन्होंने कम्प्यूटर प्रौद्योगिकी के माध्यम से हिन्दी भाषा के विकास का एक सिंहावलोकन प्रस्तुत करते हुए सभी कर्मियों से अपील की कि ज्यादा से ज्यादा कोशिश ‘मंगल फौंट’ में हिन्दी टाइपिंग की हो। यह सरल भी है और संचार के विभिन्न अहर्ताओं को पूरा भी करता है। कार्यशाला के अंत में उन्होंने एक स्लोगन का इस्तेमाल किया—अपनी भाषा अपना देश, देता है गौरव संदेश।

अंत में श्री तेजस्वरूप त्रिवेदी ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि राजभाषा हिन्दी को दैनिक कार्यालयी क्रियाकलाप का अंग बनाने की दिशा में हमने बहुत हद तक कामयाबी हासिल की है, किन्तु अभी भी कार्य किया जाना शेष है। उन्होंने यह भी सूचित किया कि आगामी कार्यशाला ‘अनुवाद की शैली-शिल्प एवं तकनीक’ पर केन्द्रित होगी।