कविता पर केंद्रित सन्निधि की चौदहवीं संगोष्ठी:

अपने देश में कविता की समृद्ध वाचिक परंपरा पूरी तरह से लुप्त हो गई है और उसके नाम पर जो कुछ बचा है

उसकी सराहना नहीं की जा सकती है”- लक्ष्मी शंकर वाजपेयी

 

नई दिल्ली। 24 मई 2014 ,

कविता पर केंद्रित सन्निधि की चौदहवीं संगोष्ठी“जब तक संसार में मनुष्य रहेगा तब तक कविता का वजूद बना रहेगा। कविता मनुष्य की ताकत है इसे केवल तथाकथित विद्वानों और अभिजात्यों के दायरे से बाहर लाने की जरूरत है।“ यह बात कवि-गजलकार और आकाशवाणी के उप महानिदेशक लक्ष्मी शंकर वाजपेयी ने 23 मई को गांधी हिंदुस्तानी साहित्य सभा के सभागार में आयोजित सन्निधि संगोष्ठी में कही। वाजपेयी कविता पर केंद्रित सन्निधि की चौदहवीं संगोष्ठी मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित थे। संगोष्ठी की अध्यक्षता कथाकार और कवयित्री कमल कुमार ने की।  कविता पर केंद्रित सन्निधि की चौदहवीं संगोष्ठी
काका कालेलकर और विष्णु प्रभाकर की स्मृति में नए रचनाकारों को प्रोत्साहित करने के मकसद से हर महीने होने वाली इस संगोष्ठी में वाजपेयी ने संसार में कविता की भूमिका की चर्चा करते हुए इस बात पर चिंता जताई कि अपने देश में कविता की समृद्ध वाचिक परंपरा पूरी तरह से लुप्त हो गई है और उसके नाम पर जो कुछ बचा है उसकी सराहना नहीं की जा सकती है, क्योंकि वह पूरी तरह फूहड़ हास्य-व्यंग्य तक सीमित रह गई है। उन्होंने कहा कि पहले किताबों और पत्रिकाओं में छपने वाले महान कवि भी कवि सम्मेलनों में भाग लेते थे और आम जनता कविता से जुड़ती थी। आज किताबों में छपने वाले कवि भी आम जनता से दूर हो गए हैं और फूहड़ कवि सम्मेलनों से लोगों को कोई दिशा नहीं मिलती।

कविता पर केंद्रित सन्निधि की चौदहवीं संगोष्ठी
इसके पहले संगोष्ठी में गंगेश गुंजन, ममता किरण, निरुपमा सिंह, केदारनाथ कादर, अतुल प्रभाकर, वंदना ग्रोवर, नीरज द्विवेदी, कौशल उत्प्रेती, संगीता शर्मा, रश्मि भारद्वाज, सुशीला श्योराण, आलोक खरे सहित संगोष्ठी का संचालन कर रहीं किरण आर्या ने अपनी-अपनी कविताओं का पाठ किया। इन सभी की कविताओं में देश की चिंता समाई थी और भविष्य के प्रति उम्मीदें थीं। संगोष्ठी के प्रारंभ में संगोष्ठी के मकसद को उजागर करते हुए वरिष्ठ पत्रकार प्रसून लतांत ने कहा कि आज किताबों में कविता देखने को मिलती है पर जीवन में वह खत्म हो गई है। स्वागत अतुल प्रभाकर ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन नंदन शर्मा ने किया। संगोष्ठी में युवाओं के साथ गांधी शांति प्रतिष्ठान के रमेश शर्मा और बोधि प्रकाशन के मयंक भी प्रमुख थे।

कविता पर केंद्रित सन्निधि की चौदहवीं संगोष्ठी