श्रीमती सरोज श्रीवास्तव ‘स्वाति’ के काव्य संग्रह ‘ कमल , पुरइन और तुम ‘ का लोकार्पण कार्यक्रम

प्रवासी दुनिया, अयन प्रकाशन और कथा संस्था के सहयोग से  दिनांक 1 मार्च 2014 को सरोज श्रीवास्तव   ‘स्वाति’ की  पुस्तक ‘कमल पुरइन और तुम’ का लोकापर्ण कार्यक्रम इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में झारखंड के पूर्व राज्यपाल श्री सैयद सिब्ते रज़ी उपस्थित थे। इसके अलावा पूर्व सांसद हरिकेश बहादुर ,प्रसिद्ध कवि डॉ शेरजंग गर्ग,  गीतांजलि यू.के. के प्रमुख डॉ कृष्ण कुमार मंच पर थे।  कार्यक्रम में डॉ सविता सिंह, अनिल जोशी, रमा पाण्डे,  उपेन्द्र सिंह, अनुज कुमार,  विज्ञान व्रत आदि साहित्यकार- विद्वानों  ने काव्य संग्रह के संबंध में अपने विचार रखे।  कार्यक्रम का संचालन कवियत्री प्रभाकिरण जैन ने किया।

अनुज कुमार कहानी कार हानीकार और कथा संस्था के प्रमुख अनुज ने असाधारण बिंबो और प्रतीकों की 
चर्चा करते हुए, श्रीमती सरोज श्रीवास्तव ‘स्वाति’ के काव्य संग्रह ‘ कमल , पुरइन और तुम' एक कविता डोवर  का बहुत संजीदगी और भावुकता पूर्ण पाठ किया।

 

डॉ सविता सिंह इग्नू से वि – आलोचक प्रो. सविता सिंह ने कहा कि उनकी कविता में अनकहा भी महत्वपूर्ण है, पुस्तक के आवरण को चाट जाती है दीमकें, और जीवन बन जाता है विधुर’। उन्होंने कहा कि संग्रह की कविताओं में स्त्री विमर्श संबंधी दंश यहां – वहां बिखरे हुए हैं। 

 

उपेंद्र कुमार कवि आलोचक

वि – आलोचक उपेन्द्र कुमार ने भी सरोज जी के भाषा प्रयोग और शिल्पगत खूबियों की चर्चा की।  प्रेम की अभिव्यक्ति को भावना पूर्ण बताते हुए उन्होने लेखिका को जिंदिगी की जीवनतता से युक्त बताया और कहा की यह संग्रह एक मुकाम बनाएगा । 

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री सैयद सिब्ते रज़ी ने संग्रह की कविताओं की प्रशंसा करते हुए कहा  कि ये कविताएं जीवन की सच्चाइयों को अभिव्यक्त करती हैं। उन्होंने विशेष रूप से ‘बोनसाइ’ कविता का उल्लेख करते हुए कहा कि ‘बोनसाइ’ का विकसित ना होने वाला रूपक जीवन के सभी क्षेत्रों में लागू होता है।  कार्यक्रम के दौरान स्त्री विमर्श पर हुई विशद चर्चा को ध्यान में रख उन्होंने कहा कि भारत में फेमिनिस्ट आंदोलन बहुत अर्थों में पश्चिम के फेमिनिस्ट आंदोलन से अलग रहा है। विशेष बात यह है कि इसका प्रारंभ पुरूषों द्वारा किया गया था। डॉ शेरजंग गर्ग ने श्रीमती सरोज श्रीवास्तव को उनकी काव्य साधना विशेषकर ‘ कल ही मिली थी वह’ कविता    के लिए बधाई दी।   डॉ कृष्ण कुमार ने काव्य संग्रह की भाषा और प्रतीकों की प्रशंसा की और नाम कविता में शावक जैसे प्रतीक का उल्लेख किया। कवि – व्यंगकार  अनिल जोशी ने कहा कि सरोज जी की कविताएँ मुख्य रूप से प्रेम की कविताएं हैं और उनकी भाषा, बिंब, शिल्पगत युक्तियाँ   अत्यंत सुघड़ हैं। उन्होंने सरोज जी के व्यक्तित्व विशेषकर उनके सामाजिक- साहित्यिक योगदान की प्रशंसा की। इस संदर्भ में उन्होंने उनकी कुछ चुनी हुई कविताएं ‘एक पल तुमको ना देखा तो’ और ‘प्यार के आयाम’ को उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया। 

रामा पांडे मीडिया कर्मी

मीडियाकर्मी सुश्री रमा पांडे ने उनकी कविताओं की बोल्डनेस की प्रशंसा करते हुए दोस्ती कर लूं शीर्षक से लिखी कविता- सोचती हूँ आवारगी कर लूं-’ ये बदन जो मिट्टी में मिल जाएगा, इस बदन से दोस्ती कर लूं’ कविता का पाठ किया। गज़ल़कार विज्ञान व्रत ने भी उनका भाषा की खूबियों और  सीमाओं पर चर्चा की और सरोज जी की चित्रकला की प्रशंसा की क्योंकि सरोज जी ने अपने संग्रह का आवरण भी स्वयं तैयार किया है ।कार्यक्रम के प्रारंभ में श्रीमती सरोज श्रीवास्तव ने अपनी चुनिंदा कविताओं की प्रस्तुति की। बहुचर्चित कविता- नाज़ुक टहनी पर बैठी हुई फुलचुग्गी सी रात, सूरज के कदमों की आहट पा उड़ गयी। भीगी हवा , सच, आदि का काव्यपाठ भी श्रोताओं द्वारा बहुत सराहा गया। कार्यक्रम का सुरूचिपूर्ण संचालन श्रीमती प्रभाकिरण जैन ने किया। कार्यक्रम के अंत में बी.पी. श्रीवास्तव द्वारा धन्यवाद ज्ञापन किया गया। कार्यक्रम में श्री डी.पी.सिन्हा, डॉ योगेन्द्र नारायण,  डॉ सीतेश आलोक, अलका सिन्हा, राकेश दुबे, डा आर.पी. श्रीवास्तव, आनंद कुमार, निर्मल वैध, सरोज शर्मा, पूनम मटिया , एस के त्रिपाठी , सत्या त्रिपाठी , अवधेश सिंह ,नारायण कुमार, पंकज सिंह, रामेश्वर प्रेम और विदेशों से पधारी अरूणा सब्बरवाल, ( ब्रिटेन) अनिता कपूर ( अमेरिका), श्रीमती स्नेह ठाकुर ( कनाडा)  इत्यादि विद्वान- साहित्यकारों की उपस्थिति थी। 

लोकार्पण ग्रुप तस्वीर