काका कालेलकर और विष्णु प्रभाकर की स्मृति में सन्निधि संगोष्ठी :


 

 

केवल लिखें नहींअपने समकालीनों को पढ़ें भी - कथाकार अजय नावरिया

 

काका कालेलकर और विष्णु प्रभाकर की
स्मृति में सन्निधि संगोष्ठी
लित लेखक संघ के अध्यक्ष और कथाकार अजय नावरिया ने कहा कि हर नए रचनाकारों को लेखन के प्रारंभिक दौर में ही यह तय करना चाहिए कि वे किस विधा में खुद को बेहतरीन तरीके से अभिव्यक्त कर सकते हैं। अगर इसे तय करने में देरी होती है तो बहुत समय बरबाद हो जाता है। काका कालेलकर और विष्णु प्रभाकर की स्मृति में हर महीने होने वाली सन्निधि की 22 मार्च को हुई बारहवीं संगोष्ठी में अध्यक्षीय भाषण के दौरान नए रचनाकारों को नसीहत देते हुए नावरिया ने कहा कि केवल लिखें नहीं, अपने  समकालीनों को पढ़ें भी।

काका कालेलकर और विष्णु प्रभाकर की
स्मृति में सन्निधि संगोष्ठी
           इस बार की संगोष्ठी साहित्य की सभी विधाओं पर केंद्रित थी। गांधी हिंदुस्तानी  साहित्य सभा की मंत्री कुसुम शाह के सान्निध्य में विशिष्ठ अतिथि सुरेश शर्मा  सहित सुशील जोशी, शिखा सिंह, सीमा अग्रवाल, अरुण शर्मा अनंत, आरती स्मित, सुमन  जान्हवी, राजीव तनेजा, गुंजन गर्ग अग्रवाल, नीरज द्विवेदी, अविनाश वाचस्पति  मुन्ना भाई, पीके शर्मा, किशोर कुमार कौशल और संगोष्ठी की संयोजिका किरण आर्या  ने रचनाओं का पाठ किया।

 

                
काका कालेलकर और विष्णु प्रभाकर की
स्मृति में सन्निधि संगोष्ठी
काका कालेलकर और विष्णु प्रभाकर की
स्मृति में सन्निधि संगोष्ठी
विशिष्ठि अतिथि और इद्रप्रस्थ प्रेस क्लब के अध्यक्ष  नरेंद्र भंडारी ने साहित्य में पत्रकारों की भूमिका पर अपने विचार रखे।  संगोष्ठी की मुख्य अतिथि और ‘नंदन’ पत्रिका की पूर्व संपादक और लेखिका क्षमा  शर्मा ने संगोष्ठी में नए रचनाकारों की रचनाओं पर कहा कि वे समय को पहचान कर  उससे सीधे जूझ रहे हैं और परिपक्व सृजनशील बनने को प्रयत्नशील हैं। शर्मा गांधी  हिंदुस्तानी साहित्य सभा और विष्णु प्रभाकर प्रतिष्ठान की ओर से सन्निधि सभागार  में आयोजित इस संगोष्ठी में नए रचनाकारों की मौजूदगी और उनके उत्साह पर हैरान  भी हुईं और खुश भी हुईं।

 

इसके पहले वरिष्ठ पत्रकार प्रसून लतांत ने कहा कि बढ़ते  हुए पौधे नापे नहीं जाते। इसलिए इस संगोष्ठी में भाग लेने वाले नए रचनाकारों के  लिए हम लकड़हारे की नहीं, माली की तरह भूमिका निभा रहे हैं।  विष्णु प्रभाकर प्रतिष्ठान के सचिव अतुल कुमार ने कहा कि राजधानी दिल्ली में ऐसे भी लेखक  समूह हैं जो पिछले तीस सालों से लगातार मासिक संगोष्ठी करते आ रहे हैं। उनके सामने हम लोगों की उपलब्धियां बहुत कम हैं। धन्यवाद ज्ञापन नंदन शर्मा ने किया। संचालन किरण आर्या ने किया। प्रस्तुति – अनीता अवधेश