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कवि डॉ.कुंअर बेचैन के अमृत महोत्सव में उमड़ा जन सैलाब  -सौ से अधिक संस्थाओं ने किया सम्मानित  

मानव होना भाग्य है, कवि होना सैभाग्य- गोपाल दास नीरज  

अखिल भारतीय साहित्य परिषद के पदाधिकारी व प्रशंशकों का हुजूम  डॉ कुँवर बेचैन की  छतरी के साथ प्रेक्षागृह द्वार परगाजियाबाद। विगत 8 जुलाई , हिन्दी भवन , लोहिया नगर गाजियाबाद में अखिल भारतीय साहित्य परिषद के तत्वाधान में अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त साहित्यकार एवं शहर के गौरव महाकवि डॉ. कुंअर बेचैन के जीवन के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में अमृत महोत्सव एवं काव्य संध्या का आयोजन किया गया। 1 जुलाई 1942 को जन्मे डॉ. कुंअर बेचैन का असली नाम डॉ० कुँवर बहादुर सक्सेना है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वयोवृद्ध और बीमारी से काफी कमजोर हो चुके सुविख्यात गीतकार पद्मभूषण गोपालदास नीरज ने कहा कि कुंअर बेचैन की कविताएं युगों-युगों तक साहित्य और दस्तवेज के रूप मे जीवित रहेंगी। अपनी मौजूदगी से इस समारोह को नयी ऊँचाइयाँ देते हुए उन्होंने अपने काव्यपाठ के दौरान कहा कि आत्मा के सौन्दर्य का शब्द रूप है काव्य। मानव होना भग्य है,कवि होना सौभाग्य।

पेड़ों की छांव तले रचना पाठ व  भारतीय साहित्य संगम ने अभिनंदन कियासाहित्य परिषद क भव्य सम्मान के बाद देशभर की सौ से अधिक संस्थाओं ने डॉ. कुंअर बेचैन का एक-एक कर सम्मान किया।  इस क्रम में “पेड़ों की छांव तले रचना पाठ गोष्ठी” के संयोजक कवि अवधेश सिंह ने शाल उढ़ा कर डॉ कुँवर बेचैन का सम्मान किया । वहीं भारतीय साहित्य संगम की संयोजिका प्रतिभा माही ने पुष्प गुच्छ व प्रमाण पत्र आदि के साथ डॉ बेचैन का अभिनंदन किया ।

इस मौके पर डॉ बेचैन के व्यक्तित्व और कृतित्व पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री भी दिखाई गई। वरिष्ठ साहित्यकार बाल स्वरूप राही ने अपने वकतव्य में इस बात को रेखांकित करते हुए कहा कि मैंने अपने जीवन में अभी तक किसी साहित्यकार का ऐसा सम्मान नहीं देखा है। राज्यमंत्री अतुल गर्ग ने कहा कि ये शहर का सौभाग्य रहा कि डॉ.कुंअर बेचैन ने गाजियाबाद को अपनी कर्मभूमि बनाया और देश-विदेश में उनके नाम से इस शहर की पहचान बनी। वहीं वरिष्ठ कवि गोविन्द व्यास ने डॉ. कुंअर बेचैन के रचनात्मक जीवन के साथ-साथ उनके विनम्र व्यक्तित्व पर भी प्रकाश डाला।

पद्मभूषण गोपालदास नीरज के साथ इस अवसर पर कुछ पलइस मौके पर वरिष्ठ कवि कृष्ण मित्र, पुष्पा राही, देवेन्द्र देव,चैतन्य चेतन, डॉ.अमर नाथ अमर, परिषद की अध्यक्ष मीरा शलभ, डॉ. रमा सिंह ने अपने विचार व्यक्त किए। अंत में डॉ. कुँअर बचैन ने इस ऐतिहासिक सम्मान के लिए संस्था के सभी सदस्यों का आभार व्यक्त किया।उन्होंने अपने जीवन से जुड़े अनेक प्रसंग सुनाए और कविता पाठ करते हुए भावुक भी हो उठे। इस कार्यक्रम का संचालन डॉ अल्पना सुहासिनी और परिषद के सचिव चेतन अनंद ने किया।

 कार्यक्रम में मुख्य रूप से वंदना कुँअर रायजादा, शरद रायजादा, वर्णिका, सिद्धार्थ, गीता गंगोत्री, बीएल गौड़, बीएल बत्रा, अशोक श्रीवास्तव, महेश आहूजा, तूलिका सेठ, रोमी माथुर, विजया कुमारी अहसास, डॉ.राखी अग्रवाल, डॉ पी कुमार, वीके शेखर, चन्द्रभानु मिश्र, हिमांशु लव, मयंक गोयल, रतनदेव साध, डॉ. अनिल असीम, अजीत श्रीवास्तव, अंजू जैन, अनूप पाण्डेय आदि मौजूद थे।