दहलीजदहलीज

1.

माँ कहती थी डांट कर

अगर दहलीज पर

पाँव भी रक्खा तो..

दादी बड़बड़ाती थी

क्या मजाल जो कर ले कोई

उनके सामने दहलीज पार  

बड़े प्यार से

बताया करती थी वह

दहलीज के मायने

दहलीज के आधार

तब के समय

दहलीज के अंदर ही थे

मिलन – मुलाक़ात

सपने और उल्लास की बात

एक पूरा संसार

 

2.

एपार्टमेंट में अब

नहीं होती दहलीज

कंकरीट के इन

रिहायसी जंगलों में

खो गए है इसके अर्थ

भौतिकता – सुविधा के प्रपंचों में

दहलीज के बिना

घुटती जा रही है इंसानियत

प्रेम विश्वास

उल्लास भरी सांस

मशीनी जिंदिगी जीने को

मजबूर है आज का समर्थ

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