पुस्तक मिली 


 

पुस्तक समीक्षा : सरोज श्रीवास्तव ‘स्वाती’ की कविताओं का संग्रह ‘कमल पुरइन और तुम’ 

जीवन के सारे भावों को एक साथ समेटे शब्दों का पुष्प गुच्छ – अवधेश सिंह 

कमल पुरइन और तुम प्रेम कविताओ की पुस्तक चर्चा

‘कमल पुरइन और तुम’ कविताओं का संग्रह अभी हांथ मे ही है और मैं अपने ‘कमल’ यानि मन, ‘पुरइन’ यानि त्यागे गए अहंकार और ‘तुम’ यानि मन के अंदर समाहित खुद को यानि ‘मैं’ को पढ़ना शुरू कर देता हूँ। मैं जो प्रेम में डूबा है, स्मृतियों से अभिभूत है । यह इस किताब की एक विशेषता हो सकती है ।  

कदाचित यही भाव भूमिका इस संग्रह की कविताओं की रचयिता है, जहां कमल का संदर्भ हृदय से है और पुरइन कमल से टूट कर अलग हुए पत्ते नहीं हैं बल्कि हृदय से अलग हुए अहं भाव हैं, जिससे उद्घाटित है एक नया ‘स्वयं’ है, जिसे लेखिका ने तुम कह कर संबोधित किया गया है।

यह ‘तुम’ अपने में समाया और शरीर से जुदा कोई प्रिय व्यक्ति भी हो सकता है और दर्शन की दृष्टि से देखे तो यह ‘तुम’ कोई और नहीं बल्कि दुनिया की तमाम स्वार्थो – इच्छाओं को त्याग से व्युत्पन्न अंदर के ‘मैं’ के प्रति प्रेम की अनुभूति की एक परकाष्ठा भी हो सकती है।

‘कमल पुरइन और तुम’ कविताओं का संग्रह में जहां प्रेम है वहाँ त्याग है,बिछोह है,प्रतीक्षा है, अंतरंगता है, दुनियादारी है, संसर्ग है , आकर्षण है, विराग है, अनुराग है, डुबना है, इतराना है, ढूँढना है, खो जाना है, अतः जीवन के सारे भावों को एक साथ समेटे शब्दों के पुष्प गुच्छ के रूप में यह संग्रह है।

सरोज जी के इस संग्रह में उनका भूतकाल और वर्तमान दोनों एक साथ गलबहियाँ डाले नजर आते एक तरफ वह भोगे गए पलों, खूबसूरत फिज़ाएँ को विस्मृति नहीं कर पा रहीं हैं दूसरी तरफ वर्तमान की सुगंध भी उन्हे अपनी ओर खींच रही है , एक एक पल को सामने रखकर उसमें जिंदिगी भरने के उनके भाव हर कविता में नजर आते हैं ।

लेखिका कई बार कविताओं में कुछ अनकहा छोड़ देती हैं लेकिन इस संग्रह में किसी अन्य कविता में वह छूटी बात कही जाती है , भूत –वर्तमान और भविष्य के बड़े पर्दे पर निरंतरता का एहसास ही है यह कविता संग्रह जिससे यह बात कहने की गुंजाइस नहीं रहती की संग्रह कुछ वर्ष पहले प्रकाशित होता तो अच्छा था ।

 मैं यहाँ सरोज जी की दो कवितायें उद्ध्रत करना चाहूँगा सबसे पहले उदाहरण के लिए संग्रह की कविता “एक पल” ले सकते हैं , जिसमें प्रेम के एक एक क्षण को यथार्थ में बदलते दिखाया गया है की कुछ लाइने संदर्भ मे पढ़ी जा सकती हैं :

 

     

कवियत्री सरोज स्वाती परिचय

 

अगर मैंने बस

   इस एक पल तुमको न देखा !

तो मैं कुछ और बन जाऊँगी ,

यह सुनहरा संसार

वीरान हो अपनी चमक

 खो देगा ,

 अगर मैंने बस

 इस एक पल तुमको न देखा ! [एक पल से]

                                                                       

 यह सत्य है की प्रेम में अनुराग और विराग जब एक सिक्के के दो पहलू हों तो प्रेम उगेगा भी और अलगाव की गर्म हवा उसे झुलसाएगी भी, भाव और अभाव की अनुभूति एक साथ कदमताल करेगी  सरोज की कविता “रात तो बीत गई” इसका उदाहरण है  :

रात तो बीत गई

पर सुबह नहीं आई

मेरा कोई आँसू

तुम्हारा न था ....

तुम्हारी आँखों की मुस्कान

मेरी न थी .....

हम साथ रह कर भी कितने

अकेले रहे !  [रात तो बीत गई से ]

सरोज श्रीवास्तव ‘स्वाती’ की कविताओं के इस संग्रह ‘कमल पुरइन और तुम’ का प्रकाशन आयन प्रकाशन , महरौली , नई दिल्ली 110030 से हुआ है इसकी कवर पेंटिंग स्वयं सरोज श्रीवास्तव ‘स्वाती’ की मौलिक चित्र कला है , इसका मूल्य 300/ है जिसको प्राप्त करने के लिए प्रकाशक से 011-26645812 या 9818988613 से संपर्क कर सकते हैं। 

-    अवधेश सिंह [लेखक –कवि ]