बेबाक बात


 

बेबाक बात : कहानी संग्रह-“वामन अवतार” पर लेखक : मनीष कुमार सिंह से 

"यह सच है की समाज में जो घटनाएँ हो रही हैं उनसे प्रभावित हुए बिना रचनाकर नहीं रह सकता है । मनीष कुमार सिंह का तीसरा और नया कहानी संग्रह “वामन अवतार” इस बात की पुष्टि करता है । इस कहानी संग्रह में प्रकाशित 20 कहानियां समाज की दिशा और दशा तथा लेखक की अवधारणा का वह संगम है जो पाठक को एक सिरे से दूसरे सिरे तक बांधे रखता है । मनीष कुमार सिंह से संग्रह पर हुई बेबाक बातचीत"- अवधेश सिंह  

 

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कहानी संग्रह : वामन अवतार ,  लेखक : मनीष कुमार सिंह ,  संपर्क : 9868140022 

 मूल्य – 250/,  प्रकाशन : अद्वैत प्रकाशन,  ई – 17 , पंचशील गार्डेन , नवीन शाहदरा , दिल्ली – 110032

संपादक : आपने अपनी पहली कहानी कब और किस विषय पर लिखी थी , लिखने की प्रेरणा कहाँ से मिली ।

मनीष : अवधेश जी मैंने अपनी पहली कहानी सन् 1987 में लिखी जिसका शीर्षक ‘नैतिकता का पुजारी’ था। यह एक छोटी सी कहानी थी जिसमें एक पाखंडी किस्म के बुद्धजीवी पर व्यंग था। लेकिन लिखने से पहले बचपन से ही मुझे पढ़ने का बड़ा शौक था। बच्चों  की पत्रिकाओं और किताबों से लेकर अपने बड़े भाई-बहनों के हिन्दी  के पाठ्यक्रम में शामिल कहानियॉ और घर में उपलब्ध  किताबें पढ़ता रहता था। अभी भी लाइब्रेरी से किताबें लाकर पढ़ना बद्स्‍तूर जारी है।

संपादक : विषय वस्तु का चुनाव के पीछे का सच क्या है

मनीष : यह काफी हद तक विषय-वस्तु  और हम जो कहना चाहते हैं इस पर निर्भर है। कहीं पर यह सब कुछ खत्म हो जाने के बाद भी कुछ बचा लेने की कोशिश को दर्शाना है तो कहीं यह घनघोर यथार्थ के मध्य आदर्श की न्यून  ही सही मगर सार्थक उपस्थिति को प्रस्तुत  करना है। कभी-कभी गलत प्रवृत्तियॉ अत्यंत शक्तिशाली होने के बाद भी हार जाती हैं। पिछले दिनों कई ताकतवर लोगों का जो हाल हुआ वह इसका एक उदाहरण है।

संपादक :आपकी सबसे अच्छी कहानी कौन है

मनीष :  इसका फैसला आपको और पुस्तक के पाठकों को करना है। मेरे लिए यह चुनना मुश्किल है। लगभग हर कहानी में साधारण आदमी अपनी सम्पूर्ण  साधारणता के साथ परिस्थितियों से जूझता दिखता है। विद्रूपता और मानवीय भाव दोनों ही सहअस्तित्‍व में मौजूद मिलेगें।

संपादक :कौन सी कहानी आपका प्रतिनिधित्व करती है

मनीष : इस प्रश्न  का भी कोई वस्तुनिष्ठ उत्तर  देना संभव  नहीं है। हर कहानी का रचयिता मैं हॅू इसलिए उसके गुण-दोष के पूर्णतया ज़िम्मेवार  भी खुद हॅू। हर कहानी मेरे लेखन को किसी न किसी रुप में अभिव्यक्त करती है। विषय-वस्तु  के अनुसार कहानियॉ अलग हो सकती हैं परंतु  हमारा लेखन जरा ध्यान  से देखने पर पहचाना जा सकता है।

संपादक :वामन अवतार  में सबसे अच्छा क्या है

मनीष :  मेरा उद्देश्य  खुद को अभिव्यक्त  करना है। लेखनी उसका एक माध्यम  है। वर्तमान में चल रहे तथाकथित विर्मशों और प्रवृत्तियों को एक हद तक जानता हॅू परंतु  उनसे प्रभावित होकर लिखने की बजाए अपनी काबिलियत की सीमाओं,सही-गलत के विवेक और जो देख व महसूस कर रहा हॅू उसे संलिष्ट  रुप में पेश कर बेहतर समझता हॅू। पारिवारिक और मानव समुदायों के बीच पाए जाने वाले आत्मीय रिश्ते और अनुरागी परिवेश का क्षरण मुझे तकलीफ देता है। जहॉ-जहॉ यह तमाम दबावों के बावजूद बचा हुआ है उसे दिखाना और आगे भी संजोकर रखना मेरी कई कहानियों का मुख्य स्वर है। भौतिक उपादानों की जमाखोरी पर आधारित एक सतही किस्म की श्रेष्ठता  की निस्‍सारता कुछ कहानियों में सामने आयी है। मेरे विचार से पुस्‍तक का श्रेष्ठ तत्व यही है।