नव गीत – बसंत है आज उदास – अवधेश सिंह


Basant

नव गीत: बसंत है आज उदास

आसमान है

राज छुपाए

ओस नहीं

आँसू टपकाए

खेतों में फूली सरसों

प्रश्नों को

हल से बातियाए

नयी फसलों के

आंगन अब

आना भूल गया उल्लास

बसंत है आज उदास ………

 

मौसम की रूठी

है महफिल

फूलों की डाली

है बोझिल

बगिया का सूना

 है दिल

बसंत को क्या

है हासिल

पतझड़ ने रोकी

सबकी सांस

बसंत है आज उदास ………

 

 तय था खिलना

पुष्प

खिले  नहीं

मिलना तय था

वो

मिले नहीं

शीतल हवा

के रुख बदले हैं

ठंड – धुन्द के

पर निकले हैं

कलियों के

होठ बंद हैं

कोहरे में

खोया विश्वास

बसंत है आज उदास ………