गाँधी के प्रति आस्था – अवधेश सिंह


Gandhi_Jayanti

गाँधी के प्रति आस्था
1.
स्वतन्त्रता संग्राम से जुड़े
सत्ता व विपक्ष कुल ने
जमा कर लिए
धन दौलत के अम्बार
आजादी के समय का दस
हो गया अब हजार
महंगाई ने बना दी एक नजीर
मायूस हो देखती है जनता
हर रूपये पर छपी
गाँधी की मुस्कराती तस्वीर


2.
गांधी संस्थान के काउंटर पर
गांधी की बड़ी फोटो सजा के
टोपी धारी सेल्स मैन बेचता है
सस्ता गाँधी का साहित्य
महंगी खादी की पोशाकें

गांधी की मार्केटिंग कर रहे
सरकारी संगठन की केनोपी
गांधी वादी के भेष में
पहन के गांधी टोपी


3.
गाँधी के सिद्धांतों के अनुरूप
बन्दर के तीन प्रतीकों
का सच्चा अनुसरण
स्वतंत्रता के पैसठ वर्ष बाद
ही हो पाया है
बुरा न देखो
बुरा न सुनो
बुरा न कहो
की तर्ज पर
सरकार ने अपना विधान चलाया है
मुद्दे पर बन्द रहे आँख और कान
मुह पर भी ताला लगाया है
गांधी के प्रति आस्था जता
सत्ता के मन मोहन ने
गाँधीयों के लिए
गाँधी को हर वक्त भुनाया है

4.

विदेशी वस्त्रों को आग लगाने
घर घर से निकले थे
आजादी के दीवाने
उलट गए अब
स्वतंत्रता के सारे पैमाने
गांधी विजन किसको माने
सरकारी उपक्रमों का विनिवेश
रिटेल पर सीधा विदेशी निवेश

राम राज्य का सपना देखे
पर अब भी जनता फटेहाल
दिखता है सब जगह घोटाला
काले धन के बड़े जाल
मिटटी हो गए सभी सवाल
उड़ गया जन लोक पाल 


5.

मैंने कहा “गाँधी को जानना है,
क्या जानते हो गान्धीज्म का अर्थ”
युवा ने पलट कर कहा
“गाँधी को जानने यूं ही
समय क्यों गवाएं ब्यर्थ
गांधी से जुड़ी समिग्री दिखाये
इंटरनेट का गूगल सर्च
बस एक क्लिक पर
घर बैठे बिना किसी खर्च”
बिना उत्तर दिये मैंने सोचा
वैसे भी अब युवा वर्ग को
गांधी से क्या नाता है
सेलेरी पैकेज
मेक्डानेल पिज्जा
ब्रांडेड विदेशी ड्रेस कोड में
गांधी कहाँ फिट हो पाता है

 

                                   ********  ---   अवधेश सिंह