पेड़ों की छांव तले रचना पाठ, वैशाली , गाजियाबाद

"पेड़ों की छांव तले रचना पाठ”

सृजन को जन सामान्य तक पहचान देने का अभिनव मंच

और विश्वस्तर की पहली अनोखी पहल

के कार्यक्रमों की संक्षिप्त विवरणी [फ़ोटोज़  व  मीडिया कवरेज

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“पेड़ों की छांव तले रचना पाठ” तैतीसवीं साहित्यिक गोष्ठी सम्पन्न:

“पेड़ों की छांव तले रचना पाठ” तैतीसवीं साहित्यिक गोष्ठीरविवार, 25 जून ,2017, वैशाली, गाजियाबाद के सेंट्रल पार्क में “पेड़ों की छांव तले रचना पाठ” तैतीसवीं साहित्यिक गोष्ठी ने उमस और बदली से हुए असाढ़ी मौसम में पार्क की घनी हरियाली में अनुभूतियों और संवेदनाओं के पलों को जीती रचनाओं के माध्यम से जेठ और आसाढ़ की घनी सामाजिक आध्यात्मिक  विषयों को स्पर्श किया गोष्ठी को रचनात्मकता की नयी ऊँचाइयाँ प्रदान की । 

प्रमुख कवियों में गीतकार जगदीश पंकज ने सामाजिक बटवारे पर गीत पढ़ा “ अपनों को ही पाती लिखकर , खुद ही बैठे बाँच रहे हैं । /  अपने अपने रंग मंच पर , कठ पुतली से नाच रहे हैं ॥ वही कवि डॉ ईश्वर सिंह तेवतिया ने विषमताओं को पर्यावरण से जोड़ कर कहा “क्यों बगिया में खामोशी है , क्यों नदिया का जल ठहरा है । / चिड़ियों का चह चहाना चुप है , किस ने लगा दिया पहरा है ॥“ पेशे से पत्रकार कवि अमर आनंद ने अपनी विवशता को यूं व्यक्त किया “कुछ इस कदर हम पड़े हुए हैं / सवालों की तरह खड़े हुए है / मेरे नक्स पर जख्म के अक्स देखना / बेरहम जमाने से हम बहुत लड़े हुए है “। संयोजक व अवधी भाषा के वरिष्ठ कवि अवधेश सिंह ने आसाढ़ पर अपनी प्रेम कविता “ प्रिय तुम ,/ स्मृतियों की शीतलता / टांक दो मेरी कमीज पर / ऊपर से तीसरी बटन की जगह / ताकि यह हृदय के ऊपर ही रहे /इस जून की कड़ी दुपहरी में पढ़ी । बुजुर्ग कवि कृष्ण मोहन उपाध्याय ने गजल ““ जो थोड़ी सी बरसात हुई है / मेरे घर के पास हुई है “ को सुनाया। इस अवसर पर  पशुपति शर्मा , डॉ वरुण कुमार तिवारी मनोज दिवेदी ,सत्य सनातन ने भी अपनी रचनाओं के माध्यम से गोष्ठी को नयी ऊंचाइया प्रदान की  ।

गोष्ठी में बदलाव डॉट काम के बच्चों से संबन्धित नाटक मेमना जंगल मे का प्रदर्शन इस अवसर पर बदलाव डॉट काम के बच्चों से संबन्धित साहित्यिक सुरुचि व सृजन को उत्साहित करने वाले कार्यशाला के समूह ‘बदलाव बाल क्लब” के छोटे छोटे बच्चों ने कविता , कहानी व यात्रा वृतांत का वाचन किया तथा नुक्कड़ नाटक का प्रभावशाली प्रस्तुतीकरण किया । प्रतिभागी बच्चों में आदि ,लाखी नागर , आयुष ,खुशी ,रिया ,रिद्दमा , गौरिका ,प्रांशुल प्रमुख रहे । 

 वैशाली , गाजियाबाद 28 मई 2017

“पेड़ों की छांव तले रचना पाठ” बत्तीसवीं साहित्यिक गोष्ठी सम्पन्न: 28 मई 201728 मई 2017,रविवार,गाजियाबाद वैशाली के सेंट्रल पार्क में “पेड़ों की छांव तले रचना पाठ” बत्तीसवीं साहित्यिक गोष्ठी ने प्रातः हल्की बारिश से हुए शीतल व मनोरम नैसर्गिक वातावरण व घनी हरियाली में अनुभूतियों और संवेदनाओं के पलों को जीती रचनाओं के माध्यम से पारिवारिक व सामाजिक आध्यात्मिक  विषयों को स्पर्श किया गोष्ठी को गंभीरता की नयी ऊँचाइयाँ प्रदान की । 

 प्रमुख रूप से वरिष्ठ कवि कन्हैया लाल खरे ने प्रणय गीत “ गीत बन कर चलो साथ में तुम प्रिये, मैं तुम्हें ही सदा गुनगुनाना चाहता” का भाव विभोर पाठ किया , गोष्ठी की अध्यक्षता निभा रहे वरिष्ठ कवि आलोचक डॉ वरुण कुमार तिवारी ने “खुशगवार मौसम” व “कविता ही तो है” शीर्षक की दो कविता पढ़ी । संचालन कर रहे संयोजक अवधी भाषा के वरिष्ठ कवि अवधेश सिंह ने अपनी नयी कविता “ बदली हवा के रुख पर न जाइए , एक अदद बदलाव खुद पे लाइये । जिंदिगी है संग, संगेदिल यहाँ , मिजाजे दिल पहाड़ों सा बनाइये ” का पाठ किया । गजलकार कृष्ण मोहन उपाध्याय, रामचन्द्र जोगेश्वर सहित इस अवसर पर कहानीकार  मनीष कुमार सिंह ने अपनी कहानी “चित्रमाला का शीर्षक” का वाचन किया वहीं व्यंगकार कवि ब्रजेन्द्र नाथ मिश्र ने फ़ेसबुक में टैग विधा पर हास्य व्यंग की बड़ी रचना “ टैगने की आत्म विभोरता“ का पाठ किया ,

उपस्थित प्रबुद्ध श्रोताओं में सर्व श्री कपिल देव नागर , मनीष कुमार सिंह , धीरेंद्र नाथ तिवारी , गुप्तेश्वर प्रसाद ,रतन लाल गौर ,सी॰एम॰ झा ,दयाल चंद्र , रामकृष्ण शर्मा व श्रीमती अनीता सिंह काव्य पाठ का आनंद लिया और रचनाकारों का उत्साह वर्धन किया । 

वैशाली , गाजियाबाद 23 अप्रैल 2017

“पेड़ों की छांव तले रचना पाठ” इक्तीसवीं साहित्यिक गोष्ठी ने नैसर्गिक वातावरण व घनी हरियाली में अनुभूतियों और संवेदनाओं के पलों को जीती   रचनाओं के माध्यम से जीवन के कई रंग भरे और गोष्ठी को नयी ऊँचाइयाँ प्रदान की । 

पेड़ों की छांव तले रचना पाठ इक्तीसवीं साहित्यिक गोष्ठी  “पेड़ों की छांव तले रचना पाठ” संवेदनात्मक कोमल भावपूर्ण अनुभूति की अभिव्यक्ति को प्रस्तुत करने का वह नैसर्गिक प्राकृतिक मंच रहा है जो आज पुनः अपने 31वें अंक में प्रेम सौहार्द अवसाद और सामाजिक वंचनाओं के विभिन्न भावों से लबरेज कविताओं, गीतों और गजलों को समर्पित रहा ।

प्रमुख रूप से वरिष्ठ कवि ब्रजेन्द्र नाथ मिश्र , अवधेश निर्झर ,शैल भदावरी , अमर आनंद ,रघुवीर शर्मा , सनातन शास्त्री ,मनोज दिवेदी सहित गोष्ठी की अध्यक्षता निभा रहे कृष्ण मोहन उपाध्याय व संचालन कर रहे संयोजक अवधेश सिंह ने अपनी सारगर्भित रचनाओं का पाठ किया ।  नवोदित कवियों में सुश्री रिंकू मिश्रा , राम भदावर व भगत बलियावादी ने श्रोताओं की वाह वाही और शाबाशी प्राप्त की ।

उपस्थित प्रबुद्ध श्रोताओं में सर्व श्री कपिल देव नागर , मनीष कुमार सिंह , संजीव ठाकुर , शत्रुघन प्रसाद , रतन लाल गौर , प्रमोद कुमार , राजदेव प्रसाद  सिंह , प्रशांत तिवारी , सी॰एम॰ झा , दयाल चंद्र , सनातन शास्त्री व श्रीमती अनीता सिंह व शोभिता सिंह ने काव्य पाठ का आनंद लिया और रचनाकारों का उत्साह वर्धन किया । 

वैशाली , गाजियाबाद 26 मार्च 2017
“ पेड़ों की छांव तले रचना पाठ” के अंतर्गत 30वीं साहित्यिक गोष्ठी वैशाली गाजियाबाद स्थित हरे भरे मनोरम सेंट्रल पार्क में सम्पन्न हुई , मदमाती बसंत ऋतु से उपजे प्रणय अनुभूति से शब्द गीत बन कर कसमसाये , फाग के रंगो से कबीरा सारा रारा व मानवीय संवेदनाओं के कई रंग बिखेरे गए मध्यान्ह उपरांत 4 बजे से प्रारंभ हुई

पेड़ों की छांव तले रचना पाठ, वैशाली , गाजियाबाद 26 मार्च  2017 " पेड़ों की छांव तले रचना पाठ ” कविता , गीत , गजल , दोहे की सृजनात्मकता के साथ लेखक नाटक कार दिनकर शर्मा ने मुंशी प्रेमचंद्र की कहानी “बड़े भाई” को एकल मंचन के माध्यम से अद्भुतरूप में प्रस्तुत ही नहीं किया बल्कि पात्रों को सजीव कर दिखाया । कार्यक्रम देर शाम अंधेरा होने तक चलता रहा ॥ उपस्थित कवियों में कवियत्री सुप्रिया सिंह वीणा , ईश्वर सिंह तेवतिया ,गजलकार गीत कार मृत्युंजय साधक ,कृष्ण मोहन उपाध्याय ,अवधेश सिंह, डॉ वरुण कुमार तिवारी ,सनातन, कन्हैया लाल खरे, सुरेन्द्र कुमार अरोड़ा ने गीत पढ़ कर श्रोताओं को भाव विभोर किया । गोष्ठी के मुख्य अतिथि प्रख्यात और वरिष्ठ नवगीत कार डॉ राधे श्याम बंधु ने गीत व गजल सुना कर साहित्यिक गोष्ठी को उसके उच्चतम मुकाम तक पहुंचाया । गोष्ठी में युवा रणवीर सिंह अनुपम ने दोहे व गीत पढे वहीं मनोज दिवेदी ने गीत और कविताओं से गोष्ठी को सफल बनाने में सहयोग किया । हास्य के सुपरचित कवि शैल भधावरी ने घनाक्षरी में व हास्य क्षणिकाओं के विख्यात वरिष्ठ कवि प्रमोद मनसुखा ने चार पंक्तियों के द्वारा अपने अंदाज में लोगों को हँसाया ।

वैशाली , गाजियाबाद 26 फरवरी 2017

“ पेड़ों की छांव तले रचना पाठ” के अंतर्गत 29वीं साहित्यिक गोष्ठी वैशाली गाजियाबाद स्थित हरे भरे मनोरम सेंट्रल पार्क में सम्पन्न हुई , मध्यान्ह उपरांत 3 बजे से प्रारंभ हुई “ पेड़ों की छांव तले रचना पाठ ” कविता , गीत , गजल , दोहे की सृजनात्मकता पर बसंत ऋतु पर समर्पित रही।

पेड़ों की छांव तले रचना पाठ, वैशाली , गाजियाबाद 26 फरवरी 2017 प्रमुख कवियों में वरिष्ठ कवि कृष्ण मोहन उपाध्याय, रणवीर सिंह, अवधेश सिंह, अमर आन, कवियत्री सुश्री मीता राय, उमेश चंद्र अग्रवाल,कन्हैया लाल खरे,रामेश्वर दयाल शास्त्री , नीरद जनवेणु, संजीव ठाकुर, डॉ वरुण कुमार तिवारी, मनोज दिवेदी  व प्रमोद मनसुखा ने अपनी कवितायें पढ़ी ।

उपस्थित प्रबुध अतिथियों में प्रमुख रूप से वरिष्ठ चर्चित कहानी व उपन्यास कार मनीष कुमार सिंह  थे । सर्वश्री शिवानंद तिवारी, गोविंद सिंह ,रति राम ,सी एस झा , प्रमोद कुमार वर्मा  , दयाल चंद्र , आर सी पाण्डेय , धीरेन्द्र नाथ तिवारी ,हरीश चंद्र जोशी , राम कृष्ण शर्मा , राम अवतार गर्ग , कपिल देव नागर , जेएस रावत व  बीर राज टंडन  आदि प्रबुध श्रोताओं ने रचनाकारों के उत्साह को बढ़ाया । गोष्ठी का सफल संचालन संयोजक कवि अवधेश सिंह ने किया ।

वैशाली , गाजियाबाद 29 जनवरी 2017

“ पेड़ों की छांव तले रचना पाठ” के अंतर्गत 28वीं साहित्यिक गोष्ठी वैशाली गाजियाबाद स्थित हरे भरे मनोरम सेंट्रल पार्क में सम्पन्न हुई , कड़ाके की ठंड और धुंध के बीच गायब हुए सूर्य ने आज दर्शन दिये इससे आशा से अधिक कवि और साहित्य प्रेमियों का जमावड़ा रहा ।

पेड़ों की छांव तले रचना पाठ, वैशाली , गाजियाबाद 29  जनवरी 2017 मध्यान्ह उपरांत 3 बजे से प्रारंभ हुई आज की गोष्ठी में अति वरिष्ठ व व्योवृद्ध गजलकार “हरेराम समीप” हमारे विशिष्ट अतिथि थे इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में पधारे कवि विचारक शैलेंद्र भारद्वाज जी ने हरेराम समीप को मंच की ओर से शाल व पुस्तक प्रतीक चिन्ह के साथ सम्मानित किया ।

गजलकार “हरेराम समीप” को प्रमुखता के साथ सुना गया , इसके साथ ही प्रमुख रूप से उपस्थित कवियों में प्रमोद मनसुख , कृष्ण मोहन उपाध्याय , संजय शुक्ल , मृत्युंजय साधक , अवधेश सिंह , डॉ वरुण कुमार तिवारी , मीता राय , अमर आनंद , मनोज दिवेदी , डॉ इश्वर सिंह , सुरेन्द्र कुमार अरोड़ा ने काव्य पाठ कर श्रोताओं को मंत्र मुग्ध किया ।

उपस्थित प्रबुध अतिथियों में प्रमुख रूप से परिंदे साहित्यिक पत्रिका के प्रबंध संपादक ठाकुर प्रसाद चौबे व वरिष्ठ चर्चित कहानी व उपन्यास कार मनीष कुमार सिंह  थे । सर्वश्री शिवानंद तिवारी ,  राजदेव प्रसाद सिंह , दयाल चंद्र , प्रमोद कुमार सिन्हा , धीरेन्द्र नाथ तिवारी , श्रीमति गायत्री नेमा , बी के श्रीवास्तव , शत्रुघन प्रसाद , ब्रिज मोहन गुप्ता , सुरेन्द्र प्रसाद दुबे , राम कृष्ण शर्मा , बद्री प्रसाद यादव, आदि प्रबुध श्रोताओं ने रचनाकारों के उत्साह को बढ़ाया । गोष्ठी का सफल संचालन संयोजक कवि अवधेश सिंह ने किया ।