संक्षिप्त परिचय : अवधेश सिंह


दो शब्द : अपने विषय में 

अवधेश सिंह मेरा यह जीवन वाद और अपवाद की भूल भुलैया में कब तक भटकेगा ,मुझे पता नहीं। जो मुझे ज्ञात  है, वह यह  है की.... " जिंदिगी  को उसके यथार्थ में जिया जाये और जीवन को मकसद युक्त बनाये रक्खा जाये । ऐसा मकसद जिसमें जोड़ने की बात हो , जमीन से जुडी अनुभूति - संवेदना का मिश्रण हो , अहं और लालच का त्याग हो, भाव - स्नेह की इमानदार अभिव्यक्ति दिखाई पड़े ।विरोधाभाष स्थितियां या विपरीत वातावरण कई अर्थों में जीवन के मकसद के लिए अति आवश्यक हैं,अतः  आलोचना बहुआयामी रहे जिसके आधार में रचनात्मकता उद्घोष करती रहे , इसका समर्थन भी करता हूँ ।"

"जीवन  की रोजी रोटी निर्वाह के लिए तकनीकी व प्रशासनिक कार्यों में अति संलिप्तता के रहते हुए भी हिदी जगत के बाह्य व आतंरिक परिद्रश्य से मेरा अनवरत जुडाव रहा है , अंतर्मुखी- स्वान्त: सुखाय  मौलिकता व प्रगति शीलता में रची बसी रचना धर्मिता के साथ हिंदी जीवन का अभिन्न अंग बनी रही यह सौभाग्य मुझे हमेशा रहा है। " 

"हिंदी हिंदुस्तान का ह्रदय है मेरा यह मानना है।  ग्लोबलाईजेशन में हिंदी यूरोप को पटखनी देने वाला प्रमुख औजार साबित हो सकता इस पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। हिंदी भाषा के वैश्विक प्रचार और उसके व्यापारिक उपयोग के दुरूह अभियान में रास्ट्रीय प्रबंधन संस्थाओं और  तकनीकी संस्थाओं को ईमानदारी से शामिल करने के उपाय से समुचित लाभ मिल सकेगा ऐसा मेरा विचार है "

"मेरी रचनाये पाठकों को उनकी अपनी कहानी सी लगे , मेरे शब्द संसार पाठकों की अनुभूतियों को कुरेदने को बाध्य कर उन्हें विचार की नयी दिशा दें व व्यथित पलों में अचूक मलहम का कार्य करें एवं  निराशा में नयी उर्जा का संचालन करें इस भावना से मेरी समस्त रचनाएँ , सृजन प्रिय सुधी पाठकों को साभार समर्पित हैं।  "

" मैं और मेरी अनुभूतियाँ " मेरी उक्त विचारधारा को सीधे अभिव्यक्त करने का साधन बने इस उद्देश्य के निहितार्थ हेलोहिंदी डाट काम [www.hellohindi.com] एक डिजिटल एलबम के रूप में समाज के बीच आये ऐसी परिकल्पना के अंतर्गत यह संक्षिप्त सा प्रयास हैजिसके लिए मैं , मेरे परिवार जन , सभी मित्र - शुभ चिन्तक जनों का मैं हृदय से आभारी हूँ।  - अवधेश सिंह 

जन्म: शिक्षा : जनवरी 4, 1959 , इलाहाबाद . उत्तर प्रदेश , भारत।

शिक्षा : विज्ञान स्नातक ,  मार्केटिंग मैनेजमेंट में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा, बिजनिस  एडमिनिस्ट्रेशन में परास्नातक   तक शिक्षा प्राप्त की है एडवांस लेवल टेलिकॉम ट्रेनिंग सेंटर" [ALTTC ] गाज़ियाबाद व " भारत रत्न भीम राव अंबेडकर इंस्टिट्यूट आफ टेलिकॉम ट्रेनिंग  [BRBRAITT ] जबलपुर से टेलिकॉम तकनीकी पर स्विचिंग टेक्नोलाजी ,ट्रांसमिशन ,डाटा व आई टी अनालिसिस ,वेब एंड इंट्री ग्रेटेड नेट्वर्किंग पर प्रोफेशनल प्रशिक्षण व कोर्सेज प्राप्त किये ।

परिवार : घर पर पत्नी श्रीमती अनीता सिंह ,दो पुत्रियां शोभिता व अपूर्वा हैं। साथ में सुसंस्कृत व सभी प्रकार से संपन्न स्नेही तीन अनुज क्रमशः अरुणेश सिंह [दिल्ली में निवास ], राकेश सिंह व  मुकेश सिंह [कानपुर में निवास  ] हैं। स्मृति में दिवंगत पिता स्व. बेनी प्रसाद सिंह कुशवाहा , माता स्व. सोमा देवी हैं

सम्प्रति : वर्तमान में ग्रेड - ई 5 सीनियर  एक्जीक्युटिव  अधिकारी पद पर भारत संचार निगम लिमिटेड के कार्पोरेट आफिस नयी दिल्ली में कार्यरत  हैं. डी ओ टी भारत सरकार में सीनियर सब डिवीजनल इंजीनियर टेलिकॉम के पद पर कम्प्यूटरी करण ,  योजना व प्रशासनिक तथा  वाणिज्य  अधिकारी के पद पर कामर्शियल  कार्यो से सम्बंधित विभागों के प्रमुख रहे।

प्रतिनियूक्ति  पर भारतीय सूचना सेवा के वरिष्ठ मीडिया अधिकारी के पद पर भारत सरकार के सूचना प्रसारण मंत्रालय के डी.ए.वी.पी. [DAVP] , डी.ऍफ़. पी [DFP] के प्रमुख रहे  व पी आई बी [PIB] , समाचार प्रभाग दूरदर्शन तथा आकाशवाणी विभागों से सम्बद्ध रहे [1989 -1995]  ।

साहित्यक यात्रा : 1972 में आकाशवाणी  में पहली  कविता  प्रसारित हुई मात्र तेरह वर्ष की बालावस्था में, स्कूल, विद्यालय से कालेज स्तर तक लेख , निबंध , स्लोगन , कविता लिखने का एक  क्रम   नयी कविता , गीत , नवगीत , गज़ल , शब्द चित्र , गंभीर लेख , स्वतन्त्र टिप्पड़ी कार , कला व साहित्यक समीक्षक की विधाओं के साथ आज तक निर्बाध जारी है ।

अस्सी -नब्बे के दशक में मौलिक रचनाएँ व लेख, सांस्कृतिक समीक्षायें आदि दैनिक जागरण , दैनिक आज, साप्ताहिक हिदुस्तान , धर्मयुग  आदि   में प्रकाशित हुए   तब के समय ब्याक्तिगत रूप से धर्मयुग के श्री गणेश मंत्री ,  साप्ताहिक हिंदुस्तान की श्रीमती म्रनाल पान्डे , दैनिक जागरण के स्व श्री नरेन्द्र मोहन व वरिष्ठ पत्रकार स्व श्री जीतेन्द्र मेहता , वरिष्ठ पत्रकार स्व श्री हरनारायण निगम का सानिध्य व सुझाव दिशा निर्देश प्राप्त का सौभाग्य  मिला था जो आज भी अविस्मरनीय है. प्रख्यात साहित्यकार, हिंदी प्रोफ़ेसर, पत्रकार  डाक्टर स्व श्री प्रतीक मिश्र  द्वारा  रचित    " कानपुर के कवि " एक खोज पूरक दस्तावेज में प्रतिनिध ग़जल- कविता व जीवन परिचय का संग्रह 1990 में किया गया था ।

संपादन व प्रकाशन कार्य यात्रा : सामाजिक संस्था अशोक क्लब की वार्षिकी सामाजिक गृह पत्रिका अनुभूति के संपादन व प्रकाशन कार्य 1979 से 1981 तक किया , मीडिया अधिकारी के रूप में लगातार 1990 से 1995 तक सम्बंधित नगरों की डायरी सूचना प्रसारण मंत्रालय हेतु प्रस्तुत की.  दूरसंचार विभाग की विभागीय प्रकाशन गृह पत्रिका गंतव्य कानपुर 1995 से 1998 तक, विभागीय प्रकाशन गृह पत्रिका हिमदर्शन शिमला 2000 से 2002 तक में सम्पादकीय सहयोग का कार्य  किया इसके अतिरिक्त दूरदर्शन शिमला ,आकाशवाणी तथा स्थानीय मंचों पर काव्य पाठ के साथ विभागीय राज-भाषा कार्यों में सतत संलग्नता नें हिदी साहित्य की उर्जा का लगातार उत्सर्जन किया है ।

प्रकाशित किताबें

1. प्रेम कविताओं पर आधारित संकलन "छूना बस मन"  [2013 ]

2. सामाजिक विघटन और बिखरते मूल्यों -आस्थाओं पर आधारित कविताओं का संग्रह "ठहरी बस्ती ठिठके लोग " [2014]

प्रकाशाधीन पांडुलिपियाँ : आवारगी (गजल संग्रह ) , नन्हें पंक्षी (बाल कविताओं का संगह )

अन्य संपर्क :  https://www.facebook.com/awadheshdm  व    email to : apcskp@hotmail.com

वर्तमान पता - गाजियाबाद – 201010  [ रा.राज. क्षेत्र दिल्ली, भारत ]