डॉ रमा पांडे के काव्य संग्रह, गुहार, का वातायन द्वारा विमोचन
३० जुलाई २०१४. वातायन: पोएट्री ऑफ साउथ बैंक, लन्दन, ने डा सत्येन्द्र श्रीवास्तव की याद में एक कार्यक्रम हाउस ऑफ लौर्डस, लन्दन, में आयोजित किया, जिसमें लेखिका, फिल्म निर्माता-निर्देशक रमा पांडे के पहले काव्य संग्रह, गुहार, का भी विमोचन संपन्न हुआ.
प्रारंभ में श्रोताओं का स्वागत कार्यक्रम की मेज़बान बैरोनैस श्रीला फ्लैदर ने किया और आयोजकों को इस कार्यक्रम के आयोजन के लिए आभार प्रकट करते हुए सत्येन्द्र श्रीवास्तव को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की. यू.के हिंदी समिति के अध्यक्ष और पुरवाई के संपादक डॉ पद्मेश गुप्ता ने स्वर्गीय डा सत्येन्द्र श्रीवास्तव जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए, देश विदेश से प्राप्त महत्वपूर्ण सन्देश पढ़ कर सुनाए और डॉ सत्येन्द्र श्रीवास्तव की स्मृति में प्रकाशित 'पुरवाई' के विशेष अंक का परिचय दिया, जिसमें सत्येन्द्र जी के समस्त पहलुओं को प्रकाशित करने का प्रयास किया गया है.
डॉ रमा पांडे के काव्य संग्रह, गुहार, का वातायन द्वारा विमोचन

 [ चित्र परिचय : अगली पंक्ति: रमा पांडे, बैरोनेस फ़्लैदर, मुन्नी श्रीवास्तव, पीछे: कैलाश बुधवार, उत्तरा सुकन्या जोशी, मीरा कौशिक, भारतेंदु विमल, दिव्या माथुर, लौरेंस नौर्फ़क, पद्मेश गुप्ता एवं इंडिया रस्सल ]

वातायन की संस्थापक अध्यक्ष, सुश्री दिव्या माथुर ने युट्टा ऑस्टिन द्वारा भेजा गया सन्देश पढ़ा और सत्येन्द्र जी की आख़िरी कविता, 'किसने यह हाँक दी - जागते रहो' सुनाई. ब्रिटिश कवयित्री इंडिया रस्सल ने सत्येन्द्र जी की कविता, 'विंस्टन चर्चिल मेरी माँ को जानते थे', के अंग्रेज़ी अनुवाद का भावपूर्ण पाठ किया. सत्येन्द्र जी की पत्नी, जो इस कार्यक्रम की विशेष अतिथि भी थीं, मुन्नी श्रीवास्तव ने उन्हें भावविह्वल श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए सत्येन्द्र जी के बचपन, परिवार, शिक्षा और उनसे अपने विवाह आदि के उद्धरण प्रस्तुत किए, जिनसे श्रोताओं को सत्येन्द्र जी के जीवन और उपलब्धियों के विषय में कई नई जानकारियाँ मिलीं.
कार्यक्रम के दूसरे सत्र का संचालन विशिष्ट पत्रकार, कवि एवं उपन्यासकार भारतेंदु विमल ने किया; उन्होंने रमा पाण्डेय की रचनाओं को उनके जीवन के विभिन्न अनुभवों का महत्वपूर्ण दस्तावेज़ बताया।
इस सत्र की शुरुआत, नवोदित गायिका उत्तरा सुकन्या जोशी की सुरीली वंदना से हुई. पुरस्कृत ब्रिटिश उपन्यासकार, लौरेंस नौर्फ़क ने डा रमा पांडे की कविता, 'प्रकृति-प्रीतम' का अंग्रेज़ी अनुवाद पढ़ा और उत्तरा सुकन्या जोशी ने उनका एक लोक गीत, 'संजोग' प्रस्तुत किया, जिसे श्रोताओं ने बेहद पसंद किया.
इसके बाद डा. रमा पांडे ने मंच सम्भाला और 'गुहार' संग्रह की रचनाओं से श्रोताओं को भावविभोर कर डाला. लोक गीत, 'भरी बजरिया में छोड़ दिया रे' पर उन्हें अच्छी दाद मिली. बैरोनेस फ़्लैदर ने भी इस कविता पर टिप्पणी की कि इस नवविवाहित कन्याओं को विदेश में लाकर छोड़ देने की कुप्रथा अब तक चली आ रही है. रमा जी ने जिन प्रसिद्द रचनाओं का पाठ किया, उनमें शामिल थीं 'खाप', 'बच्चे', 'माँ से माँ तक', 'दुआ' एवं 'शगूफ़ा आइरिस नीले'. सभी कविताएँ श्रोताओं ने बेहद पसंद कीं.
कथा यू.के के अध्यक्ष एवं बीबीसी हिन्दी सेवा के पूर्व मुख्य, कैलाश बुधवार ने अपने अध्यक्षीय भाषण में सत्येन्द्र जी को एक बार फिर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और रमा पांडे के व्यक्तित्व और कृतित्व पर विचार रखे. अकैडमी की निदेशक एवं वातायन की अध्यक्षा सुश्री मीरा कौशिक, ओ.बी.ई, अकादमी की निदेशक, द्वारा धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया. इस कार्यक्रम में स्वयंसेवक शान्ति वेंकटेश, विमल रायन, शोभा माथुर, दीप्ति संघानी और शन्नो अग्रवाल का विशेष योगदान रहा. अंत में, कार्यक्रम के सहभागियों को उपहार दिए गए और मेहमानों को अल्पाहार के भेंट किया गया.
यू.के हिन्दी समिति, मोंटाज फिल्म्स और मन्जुरी प्रकाशन के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय विद्वानों, लेखकों, कवियों और मीडिया से जुड़े लोगों ने भाग लिया, जिनमें शामिल थे - जाने माने पुरस्कृत लेखक और प्रसारक, डायना मैव्रोलियों, लौरेंस नौर्फ़क, कलाकार प्रफ़ुल्ला मोहंती, जेरू राय एवं मुन्नी श्रीवास्तव; प्रसारक रज़ा अली आबिदी, नरेश कौशिक; टैगोरियंस के उपाध्यक्ष सुजीत भट्टाचारजी; विजुअल आर्ट्स की प्रबंधक वैशाली ठक्कर; सामा आर्ट्स नेटवर्क के जय विश्वादेवा, टंग्स ऑफ़ फ़ायर फिल्म फेस्टिवल की निदेशिका, पुष्पिंदर चौधरी; विशिष्ट कवि सोहन राही, इंडिया रस्सल; कौन्फ्लूऐंस के नए सम्पादक सोदीनाथन आनंदविजयन; फिल्म इतिहासकार कुसुम पन्त जोशी; गायक महबूब ख़ान एवं इन्दर सियाल; उत्तरा सुकन्या जोशी; लेखिका एवं पुरवाई की सह-सम्पादक, उषा राजे सक्सेना, जाने माने हिन्दी लेखक अचला शर्मा, प्रो श्याम मनोहर पांडे, सरोज श्रीवास्तव, कादम्बरी मेहरा, अरुणा सब्बरवाल, एवं कांती वधवा इत्यादि. [रिपोर्ट - दिव्या माथुर से ]